कुछ बंदर एक पेड़ पर बैठे हुए थे। वहीं पास में मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा था। एक बढ़ई लकड़ी के एक बड़े लठ्टे को बीच में से चीर रहा था। तभी भोजन के लिए अवकाश हो गया। उस बढ़ई ने चीरे हुए भाग के बीच में एक बड़ी सी खूंटी फसा दी। और […]from HindiSwaraj https://hindiswaraj.com/bandar-aur-lakdi-ka-khunta-panchtantra-ki-kahani-in-hindi/?utm_source=rss&utm_medium=rss&utm_campaign=bandar-aur-lakdi-ka-khunta-panchtantra-ki-kahani-in-hindi
source https://hindiswaraj.tumblr.com/post/634107270912999424
No comments:
Post a Comment